GK Quiz Competition : Part - 02 प्राचीन इतिहास - सिंधु घाटी सभ्यता
यहां पर हम आपको सिंधु घाटी सभ्यता का ओवरव्यू, सिंधु घाटी सभ्यता को आसान भाषा में समराइज करने वाले हैं। एवं उसके बाद आपको इससे जुड़े महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न कराएंगे जो बहुत सारे प्रतियोगिता एग्जाम में पूछे गए हैं एवं पूछे जाने की संभावना होगी तो इस ब्लॉक पोस्ट को ध्यानपूर्वक पड़े आपको सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में संपूर्ण जानकारी मिलेगा ।
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सिंधु घाटी सभ्यता का खोज :-
सिंधु घाटी सभ्यता जिसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है , जो विश्व में सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक एवं भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता है।
1. सबसे पहले चार्ल्स मैसेन नया 1826 ईस्वी में पाकिस्तान के दौरे पर जाने के बाद सिंधु घाटी से जुड़े कुछ जानकारी का जिक्र Narrative of journey में किया था ।
2. इसके बाद 1856 ईस्वी में बर्टन बंधु दो इंजीनियर जेम्स बर्टन और विलियम बर्टन कराची से लाहौर तक रेल लाइन लगाने के कर्म में आसपास के टीलों से एट निकालकर उपयोग किया था जिससे उन्हें ज्ञात हुआ कि यहां पर कोई पुराने इमारत होगी इसके बारे में उन्होंने ज्यादा शोध नहीं की ।
3. पहली बार अलेक्जेंडर कनिंघम (1853-1856) तक हड़प्पा क्षेत्र पर शोध करने का प्रयास किया परंतु इसे विस्तृत जानकारी नहीं मिल पायी ।
4. इसके बाद 1921 ईस्वी में भारत के पुरातात्विक विभाग के Head सर जॉर्ज मार्शल के नेतृत्व में इस क्षेत्र की खुदाई राय बहादुर दयाराम साहनी और राखल दास के नेतृत्व में हुआ । और दयाराम साहनी हड़प्पा सभ्यता और राखल दास मोहनजोदड़ो का खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया ।
सिंधु घाटी सभ्यता का काल :-
① जॉन मार्शल के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता का काल 3250 BC से 2750 BC तक होगा ।
② डीपी अग्रवाल के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता का कल कम कार्बन 14 पद्धति के अनुसार 2300 ईसा पूर्व से लेकर 1750 ईसा पूर्व तक होगा इसे कई जगह 2500 ऐसा पूर्व से लेकर 1700 ईसा पूर्व तक के कल को सिंधु घाटी सभ्यता का कल समझा जाता है।
सिंधु घाटी सभ्यता का नामकरण :-
● सिंधु सभ्यता का नाम सिंधु सभ्यता पढ़ने के पीछे यह कारण बताया जाता है कि इसके अधिकांश स्थल सिंधु नदी के किनारे प्राप्त हुए जिस कारण से सिंधु सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता के नाम से जाना जाता है।
● इसे सिंधु सरस्वती सभ्यता भी कहा जाता है क्योंकि यह सभ्यता सिंधु और सरस्वती नदी के बीच अवस्थित था
● सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि जब जॉर्ज मार्शल के नेतृत्व में सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई दयाराम साहनी के द्वारा हो रहा था तो सबसे पहले हड़प्पा स्थल की खोज हुई थी जिस कारण से इसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है।
सिंधु घाटी सभ्यता का उद्भव :-
① विदेशी मत - सिंधु सभ्यता के विषय में कुछ विदेशी इतिहासकारों का यह मत है कि सुमेरियन सभ्यता के लोग इसके निर्माता हैं ( मार्शल , हवीलर ,चाइल्ड, डीडी कौशांबी
② स्थानीय मत - सिंधु सभ्यता के बारे में स्थानीय मटिया है कि इसके निर्माता द्रविड़ हैं। (राखल दास)
③ टी एन रामचंद्र और लक्ष्मण स्वरूप पुसाल्कर के अनुसार इसके निर्माता आर्य हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता का विशेषता :-
① नगरीय सभ्यता :- सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे प्रमुख विशेषता यह रही कि यह भारत की पहली नगरीय सभ्यता थी यहीं से नगरीय स्वरूप का विकास प्रारंभ हुआ (पक्के भवन, चौड़ी सड़क, नाली ,व्यापार आदि
② कांस्ययुगीन :- सिंधु सभ्यता एक कांस्ययुगीन सभ्यता थी
③ आधऐतिहासिक सभ्यता :- सिंधु सभ्यता को आधऐतिहासिक सभ्यता इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इससे जो भी पुरातात्विक एवं साहित्यिक स्रोत प्राप्त हुए थे उसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है जिस कारण से इसे आधऐतिहासिक सभ्यता कहा जाता है।
④ सिंधु घाटी सभ्यता को शांतिप्रिय सभ्यता भी कहा जाता है।
⑤ सिंधु घाटी सभ्यता व्यापार प्रधान सभ्यता था
⑥ सिंधु घाटी सभ्यता विस्तृत सभ्यता था
⑦ सिंधु घाटी सभ्यता राजनीतिक आर्थिक सामाजिक और संस्कृत सभ्यता था
सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार
सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार भारत के उत्तर पश्चिम में लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर तक है।
① सिंधु घाटी सभ्यता का स्थल निम्न रूप से फैला हुआ है।
● अफगानिस्तान में सिंधु घाटी सभ्यता के 2 स्थल हैं।
●पाकिस्तान में लगभग 500 स्थल प्राप्त हुए
●भारत में लगभग 900 से लेकर 1000 स्थल प्राप्त हुए हैं ।
② सिंधु घाटी सभ्यता इतना विशाल काय है कि इसमें हम मेसोपोटामिया की सभ्यता और मिश्रा की सभ्यता को जोड़कर उसका 12 गुना करेंगे तब जाकर वह सिंधु घाटी सभ्यता के बराबर होंगे
③ सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे ज्यादा स्थल गुजरात से प्राप्त हुए हैं।
④ अफगानिस्तान में सिंधु घाटी सभ्यता के 2 स्थल निम्न हैं।
● शोर्तुगोई
● मुंडीकाक
⑤ पाकिस्तान में प्राप्त हुए कुछ प्रमुख सिंधु घाटी सभ्यता निम्न हैं।
● मोहनजोदड़ो
● चन्हुदड़ो
● कोटदीजी (सिंध)
● हड़प्पा (रावी नदी पश्चिमी पंजाब )
⑥ बलूचिस्तान में सिंधु घाटी सभ्यता के तीन स्थल मिले हैं।
● सुत्कागेडोर
● डाबरकोट
● बालाकोट
⑦ जम्मू कश्मीर में प्राप्त सिंधु घाटी सभ्यता निम्न है।
● मांदा (चिनाव नदी) - यह उतरी स्थल है ।
⑧ पंजाब में प्राप्त सिंधु घाटी सभ्यता निम्न है ।
● रोपड़ ( रूपनगर )
● संघोल
⑨ उत्तर प्रदेश में प्राप्त सिंधु घाटी सभ्यता निम्न है ।
● आलमगीरपुर (पूर्वी स्थल )
● संगोली
● बड़गांव
⑩ महाराष्ट्र में प्राप्त सिंधु घाटी सभ्यता निम्न है।
● दैमाबाद (अहमदनगर ) दक्षिणी स्थल
⑪ हरियाणा में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता निम्न है ।
● बनवाली
● राखीगढ़ी- भारत में प्राप्त सबसे बड़ा नगर
● भगवानपुरा
⑫ राजस्थान में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता निम्न है।
● कालीबंगा - यहां पर काले रंग की चूड़ियां प्राप्त हुआ था एवं जूते हुए खेत का प्रमाण मिला था
इसके खोजकर्ता - लाल एवं थापर हैं
● बालाथल
⑬ गुजरात में प्राप्त हुए सबसे ज्यादा सिंधु घाटी सभ्यता निम्न है।
➪ लोथल - यह सिंधु घाटी का बंदरगाह या पतन था। लोथल से ही अग्नि कुंड एवं चावल का प्रमाण मिला था
➪ धौलावीरा - धौलावीरा तीन करो में विभाजित था यहां पर नाली का व्यवस्थित प्रबंध था जो की लकड़ी की बनी थी
➪ सुतकोटदा - यहां से घोड़े का अवशेष प्राप्त हुआ था
➪ रंगपुर - यहां से चावल का प्रमाण मिला था
➪ भगतराव
➪ रोजदी
➪ सिंधु घाटी सभ्यता में प्राप्त सभी नगरों में से सबसे बड़ा नगर मोहनजोदड़ो है ।
➪ इन सभी बिंदुओं को आप मैप में भी व्यवस्थित करके अच्छे तरीके से समझ सकते हैं ।
सिंधु घाटी सभ्यता की नगर नियोजन
➪ यह ग्रीड पद्धति पर आधारित थी यानी सड़के सीधी एवं समकोण पर कटती थी एवं इसके बीच एवं किनारे पर घर प्राप्त हुए यह शतरंजनुमा संरचना जैसा था
➪ सिंधु घाटी सभ्यता के नगर नियोजन के दो भाग हुए
पूर्वी नगर एवं पश्चिमी नगर
➪ पूर्वी नगर को निचला नगर कहा गया जहां पर गरीब मजदूर किसान वर्ग के लोग रहते थे
➪ पश्चिमी नगर को दुर्ग नगर कहा गया जहां अमीर लोग रहते थे
➪ ईट कच्ची एवं पक्की ईटों से सड़क एवं महल बनाए जाते थे जो अनुपात 4:2:1 का था
➪ सड़क - मुख्य सड़क चौड़ी होती थी , गली की सड़क कम चौड़ी
➪ दरवाजा - इस सभ्यता के लोग दरवाजा मुख्य सड़क की और ना खोलकर अंदर की ओर खोलते थे इसका संभवत कारण धूल से बचने एवं अपनी सुरक्षा के लिए हो सकता है ।
➪ केवल लोथल में दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलती थे।
➪ हर घर में लगभग एक कुआं था और जल निकासी की व्यवस्था थी।
➪ शौचालय की व्यवस्था
➪ सामूहिक भवन
➪ मोहनजोदड़ो से स्नानागार का प्रमाण, अन्नागार, सभागार
● सिंधु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण स्थल , नदी , खोजकर्ता, एवं मुख्य बिंदु निम्नलिखित है ।
➪ प्रमुख स्थल - हड़प्पा ( पाकिस्तान के मोंटगोमरी जिला , पंजाब प्रांत में है ।)
➪ नदी - रावी
➪ खोजकर्ता - दयाराम साहनी (1921)
➪ मुख्य बिंदु - अन्न भंडार , कांस्य दर्पण , श्रमिक आवास , (R-37 = कब्रिस्तान)
➪ प्रमुख स्थल - मोहनजोदड़ो पाकिस्तान के लरकाना से मिला था (सिंध प्रांत)
➪ नदी - सिंधु नदी
➪ खोजकर्ता - राखल दास बनर्जी ( 1922 )
➪ मुख्य बिंदु - विशाल स्नानागार, कांस्य मूर्ति , पुरोहित की मूर्ति , महाविद्यालय , एक श्रृंगी पशु की मुद्राएं
➪ प्रमुख स्थल - लोथल भारत के गुजरात के अहमदाबाद नगर में प्राप्त हुआ
➪ नदी - भोगवा नदी
➪ खोजकर्ता - रंगनाथ राव (1957)
➪ मुख्य बिंदु - बंदरगाह/ गोदीबाड़ा / पतन , अग्निकुंड हाथी दांत , तीन युगल समाधिया , घोड़े की मृण्य मूर्ति (मिट्टी की मूर्ति )
➪ प्रमुख स्थल - कालीबंगा (हनुमानगढ़) राजस्थान
➪ नदी - घग्घर नदी
➪ खोजकर्ता - अमलानंद घोष
➪ मुख्य बिंदु - जुते हुए खेत का साक्ष्य , अग्नि के हवन कुंड , चूड़ियां , भूकंप के साक्ष्य
➪ प्रमुख स्थल - राखीगाढ़ी (हिसार) हरियाणा
➪ नदी - घग्घर नदी
➪ खोजकर्ता - सूरजभान
➪ मुख्य बिंदु - भारत में स्थित सबसे बड़ा स्थल , ताम्र उपकरण
➪ प्रमुख स्थल - चंन्हुदड़ो पाकिस्तान (सिंध प्रांत)
➪ नदी - सिंधु नदी
➪ खोजकर्ता - अर्नेस्ट मैके और मजूमदार
➪ मुख्य बिंदु - मनके बनाने का कारखाना, कंघा, लिपस्टिक, काजल पाउडर आदि, बिल्ली के पीछे कुत्ता का निशान
➪ प्रमुख स्थल - बनावली (हिसार हरियाणा)
➪ नदी - सरस्वती नदी
➪ मुख्य बिंदु - मिट्टी के हल , पके हुए मिट्टी का खिलौना - टेराकोटा ।
➪ प्रमुख स्थल - रोपड़ (रूपनगर पंजाब)
➪ नदी - सतलज नदी
➪ खोजकर्ता - यज्ञदत्त शर्मा
➪ मुख्य बिंदु - तांबे की कुल्हाड़ी
➪ प्रमुख स्थल - रंगपुर (अहमदाबाद गुजरात)
➪ नदी - भादर नदी
➪ खोजकर्ता - S.R राव
➪ मुख्य बिंदु - धान की भूसी ,ज्वार ,बाजरा
➪ प्रमुख स्थल - सुरकोटदा ( कच्छ गुजरात )
➪ नदी - सरस्वती नदी
➪ मुख्य बिंदु - कलस शवधान , घोड़े की हड्डी , तराजू (बटखारा) 16 के गुणज में मिलें।
● सभ्यता का पतन
1. मेक जॉन मार्शल - मेक जॉन मार्शल के अनुसार सब सिंधु सभ्यता का अंत/पतन भीषण बाढ़ के कारण हुआ था
2. चाइल्ड एवं व्हीलर - चाइल्ड एवं व्हीलर के अनुसार सिंधु सभ्यता का पतन विदेशी आक्रमण के कारण हुई थी
3. फेयर सर्विस - फेयर सर्विस के अनुसार सिंधु सभ्यता का पतन पारिस्थितिक असंतुलन के कारण हुई थी ।
● सिंधु सभ्यता का राजनीतिक जीवन
➪ स्रोतों के अभाव में वास्तविक व्यवस्था के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।
➪ संभवतः शासन पुरोहित या व्यापारी वर्ग या नगर प्रशासन द्वारा संचालित होता था
➪ पिगट ने मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा को सभ्यता की जुड़वा राजधानी कहा है ।
➪ हंटर ने मोहनजोदड़ो के शासन को राजतंत्रात्मक की जगह जनतंत्रात्मक माना है ।
Note - महल, अस्त्र - शस्त्र का अभाव
● सिंधु सभ्यता का सामाजिक जीवन
➪ समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार थी संभवतः परिवार मातृसत्तात्मक थी
➪ वर्ण व्यवस्था का पूर्ण प्रमाण नहीं मिलता है परंतु समाज कई वर्गों में विभाजित था पुरोहित, व्यापारी, श्रमिक, शिल्पी आदि
➪ सभ्यता के लोग शांति प्रिय थे ।
➪ शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों थे
➪ आभूषण का प्रयोग पुरुष एवं स्त्रियों दोनों करते थे
➪ मनोरंजन के रूप में - पासे, नृत्य ,शिकार ,पशुओं की लड़ाई आदि शामिल थे
● सिंधु सभ्यता का आर्थिक जीवन
1. कृषि - जुताई , बुवाई , सिंचाई सभी विधि से परिचित
➪ गेहूं, जौ , मटर, चावल कपास से परिचित
➪ गन्ना, रागी के प्रमाण नहीं ।
2. पशुपालन
➪ प्रिय पशु - कूबड़ वाला सांड
( गाय ,घोड़ा आदि से परिचित )
➪ उद्योग - सूती वस्त्र, बर्तन ,शिल्प आदि
➪ व्यापार - पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, ईरान, अफगानिस्तान, मिश्र, मेसोपोटामिया ।
➪ निर्यात - सूती वस्त्र, हाथी दांत, लकड़ी
➪ आयत - चांदी - ईरान , अफगानिस्तान
टीन - अफगानिस्तान
तांबा - खेतड़ी
लाजवर्द - मेसोपोटामिया
● सिंधु घाटी सभ्यता का धार्मिक जीवन
1. लौकिक सभ्यता पर धर्म वर्चस्वशाली नहीं ।
2. मंदिर का प्रमाण नहीं ।
3. मातृ देवी की पूजा (मोहनजोदड़ो)
4. उर्वरता देवी की पूजा (हड़प्पा)
5. नाग पूजा, लिंग योनि पूजा, स्वास्तिक चिन्ह आदि
6. अग्नि कुंड के प्रमाण :- लोथल एवं कालीबंगा से अग्नि कुंड का प्रमाण मिला ।
7. वृक्ष एवं पशु पूजा का प्रमाण ।
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